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कन्हैया कुमार – “हम हैं इस देश के”

JNU teachers & students protest

New Delhi: JNU teachers & students form a human chain inside the campus in protest against arrest of JNUSU President Kanhaiya Kumar, in New Delhi on Sunday.PTI Photo(PTI2_14_2016_000207A)

13 फ़रवरी को मोदी सरकार के कहने पर पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ़्तार करके कैद कर दिया । उनका कहना है कि कन्हैया कुमार व अन्य छात्र “देशद्रोही” हैं – क्यों ? क्योंकि इन छात्रों ने अपने देश की सरकार की आलोचना की । फ़ासीवाद का इस से बड़ा नमूना क्या हो सकता है ?  कन्हैया ने क्या कहा है कि मोदी सरकार के लोग उस को आतंकवादी समझते हैं ?  नीचे दिया गया कन्हैया का भाषण पढ़कर ख़ुद देख लीजिये –

JNUSU President Kanhaiya Kumar’s Speech: Transcript

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार का भाषण

हम हैं इस देश के । और इस मिट्टी से प्यार करते हैं । इस देश के अंदर से जो अस्सी प्रतिशद गरीब आवाम है, हम उसके लिये लड़ते हैं । हमारे लिये यही देश-हित है । हमें पूरा भरोसा है बाबा साहब के ऊपर । हमें पूरा भरोसा है अपने देश के संविधान के ऊपर । और हम इस बात को पूरे मज़बूती से कहना चाहते हैं कि इस देश की संविधान पे कोई उंगली उठायेगा चहे वह उंगली संघियों का हो, चाहे वह उंगली किसी का भी हो उस उंगली को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे । हम संविधान में भरोसा करते हैं । लेकिन जो संविधान नागपुर और झंडेवालान में पढ़ाया जाता है उस संविधान पे हमको कोई भरोसा नहीं । हमको मनुस्मृति पे कोई भरोसा नहीं है । हमको इस देश के अंदर जो जातिवाद है उस पे कोई भरोसा नहीं है । और वही संविधान, वही बाबा साहब ़डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, संविधान में संविधानिक उपचार की बात करते हैं । वही बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर कैपिटल पनिशमेंट को अबॉलिश (रद) करने की बात करते हैं । वही बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर फ़्रीडम औफ़ एक्स्प्रेशन (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) की बात करते हैं । और हम उस पोसिशन को अपहोल्ड करते हुए, जो हमारा बुनियादी आधिकार है, जो हमारा कॉन्स्टिटूशनल राईट (संविधानिक आधिकार) है, हम उसको अपहोल्ड करना चाहते हैं ।

लेकिन यह बड़े शर्म की बात है, यह बड़े दूख की बात है, कि आज ए.वी.बी.पी. (अखिल भार्तीय विद्यार्थी परिषद) अपने मीडिया सहयोगियों से पूरे मामले को ऑर्कास्ट्रेट (गुप्त रूप से आयोजित) कर रहा है । पूरे मामले को डाईलूट (धुंधला) कर रहा है । कल ए.बी.वी.पी. के जोईंट सेक्रटेरी ने कहा कि हम फ़ेलोशिप के लिये लड़ते हैं । कितना रिडिक्यूलस (हास्यस्पद) लगता है सुनकर कि इनकी सरकार, मैडम मनुस्मृति ईरानी, फ़ेलोशिप को ख़त्म करती हैं, और हम फ़ेलोशिप के लिये लड़ रहे हैं । इनकी सरकार हाईयर एडयूकेशन (उच्च शिक्षा) के अंदर 17 प्रतिशत बजट को कट किया है, जिस से हमारा होस्टल पिछले चार सालों में नहीं बना । होस्टल को वाई-फ़ाई आज तक नहीं मिला, और एक बस दिया BHEL ने तो उस में तेल डालने के लिये प्रशासन के पास पैसा नहीं है । ए.बी.वी.पी. के लोग “रोलर” के सामने देवानंद की तरह तस्वीर खींचा कर कहते हैं कि हम होस्टल बनवा रहे हैं । हम वाई-फ़ाई करना रहे हैं । हम फ़ेलोशिप बढ़वा रहे हैं । इनकी पोल-पट्टी खुल जायेगी , साथियो , अगर इस देश में बुनियादी सवाल पे चर्चा होगी । और मुझे गर्व है जे.एन.यू. के छात्र होने पे कि हम बुनियादी सवाल पे चर्चा करते हैं । हम बुनियादी सवाल उठाते हैं । और इसलिये वह [सुब्रमण्यम स्वामी] कहता है कि जे.एन.यू. में जिहादी रहते हैं । वह कहता है कि जे.एन.यू. के लोग हिंसा फैलाते हैं ।

मैं जे.एन.यू. से चनौती देना चाहता हूँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों को, कि बुलाओ उसे और करो हमारे साथ डीबेट । और हम सवाल खड़ा करना चाहते हैं, ए.बी.वी.पी. के उस दावे पर । ए.बी.वी.पी. के मंच से खड़े हो कर बोलता है बेशर्म – “खून से तिलक करेंगे गोलियों से आर्ती ।” किसका खून बहाना चाहते हो इस मुल्क में तुम ? किस का देहांत चाहते हो इस मुल्क में तुम ?

तुमने गोलियाँ चलायी हैं । अंग्रेज़ों के साथ मिल कर इस देश की अज़ादी के लिये लड़नेवाले लोगों पर गोलियाँ चलायी हैं । इस मुल्क के अंदर गरीब जब अपनी रोती की बात करता है, जब भूकमारी से मरते हुए लोग अपने हक की बात करते हैं, तुम उन पे गोली चलाते हो । किस पर गोली चलायी है तुमने इस मुल्क में ? मुसलमानों के उपर । तुमने चलायी गोली इस मुल्क में … महिलाएं जब अपने आधिकार की बात करती हैं तो तुम कहते हो पांचों उंगली बराबर नहीं हो सकती … तुम कहते हो महिलाओं को सीता की तरह रहना चाहिये और सीता की तरह अग्नी परीक्षा देना चाहिये ।

इस देश में लोकतंत्र है और लोकतंत्र सबको बराबरी का हक देता है । चाहे वह विद्यार्थी हो, चाहे वह कर्मचारी हो , चाहे वह गरीब हो , मज़दूर हो , िसान हो, या अंबानी हो अदानी हो, सबके हक की बराबरी की बात करता है । उम में महियाओं की बराबरी की बात हम करते हैं , तो यह कतहे हैं कि हम भारतीय संस्कृति को बर्बाद करना चाहते हैं । हम बर्बाद करना चाहते हैं शोषण की संस्कृति को । जातिवाद की संस्कृति को , मनुवाद और ब्राह्मणवाद की संस्कृति को । और आज तक हमारी संस्कृति की परिभाषा तय नहीं हुई । इनको दिक्कत कहाँ आता है ? इनको दिक्कत आता है जब इस मुल्क के लोग लोकतंत्र की बात करते हैं । जब लोग लाल सलाम के साथ लीला सलाम लगाते हैं , जब मार्क्स के साथ डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का नाम लेते हैं । जब अशफ़ाक़ुल्ला का नाम लिया जाता है तो इनको पेट में दर्द होता है ।

और इनकी साजिश है, ये अंग्रेज़ों के चमचे हैं । लगाओ मेरे ऊपर डेफ़मेशन केस । मैं कहता हूँ कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास अंग्रेज़ों के साथ खड़े होने का इतिहास है । देश के गदर आज देशभक्ति का सर्टिफिकट बांट रहे हैं । मेरा मोबाइल चेक के कीजिये , साथियो । मेरी माँ और बहन को भद्दी-भद्दी गालियाँ दी जा रही हैं । कौन-सी भारत माँ की बात करते हो अगर तुम्हारी भारात माता में मेरी माँ शामिल नहीं है । मुझे मंज़ूर नहीं है यह भारत माता का कॉन्सेप्ट (अवधारणा) । और इस देश की महिलाएँ जो गरीब हैं, मज़दूर हैं … मेरी माँ आँगनवादी सेविका है । तन हज़ार से हमारा परिवार चलता है । और यह उसके खिलाफ़ गालियाँ दे रहे हैं । मुझे शर्म है इस देश पर , इस देश में जो गरीब मज़दूर दलित किसान है उनकी माताएँ भारत माता नहीं हैं ।

मैं कहूँगा जय ! भारत की माताओं की जय ! पिताओं की जय ! माताओं , बहनों की जय ! किसानों , मज़दूरों , दलितों , आदिवासियों की जय ! मैं कहूँगा , तुम में हिम्मत है तो बोलो इंकलाब ज़िंदाबाद ! बोलो भगत सिंह ज़िंदाबाद ! बोलो सुखदेव ज़िंदाबाद , बोलो अशफ़ाक़ुल्ला खान ज़िंदाबाद ! बोलो बाबा साहब अंबेडकर ज़िंदाबाद !

और बाबा साहब की एक सौ पच्चीसवीं जयंती मनाने का नाटक कर रहे हो । है तुम में हिम्मत तो सवाल उठाओ , जो सवाल बाबा भीमराव अंबेडकर ने उठाया कि इस देश के अंदर जातिवाद सबसे बड़ी समस्या है । बोलो जातिवाद के ऊपर । लाओ रेज़र्वेशन ! प्राईवेट सेक्टर में रेज़र्वेशन लाओ ! तमाम जगह रेज़र्वेशन क़ायदा लागुर करो । करो फिर मानेगा यह देश तुम्हे । यह देश तुम्हारा कभु नहीं था , और कभी नहीं हो सकता ।

कोइ देश अगर बनता है , तो वहाँ के लोगों से बनता है । अगर देश की अवधारणा में भूखे लोगों के लिये जगप नहीं, गरीब मज़दूरों के लिये जगर नहीं नहीं है , वह देश नहीं है । कल मैं टी.वी. डीबेट में यह बात बोल रहा था , दीपक चौरासियाजी को , कि चौरासियाजी यह गंभीर समय है , इस बात को याद रखियेगा — अगर मुल्क में फ़ासीवाद जिस तरीके से आ रहा है , मीडिया भी सुरक्षित नहीं रहनेवाली है । उनके भी स्क्रिप्ट लिखकर आयेंगे … के ऑफ़िस से और उसके भी स्क्रिप्ट लिख कर आते थे कभी इंदिरा गांधी के कांग्रेस के ऑफ़िस से । इस बात को याद रखियेगा ।

और अगर आप सच में इस देश में देश भक्ति दिखाना चाहते हैं … कुछ मीडिया के साथी कह रहे थे , हमारे टैक्स के पैसे से , सब्सिडी के पैसे से , जे.एन.यू. चलता है । हाँ सच है । सच है कि टैक्स के पैसे से चलता है । सच है कि सब्सिडी के पैसे से चलता है । लेकिन यह सवाल खड़ा करना चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी होता किस लिये है ? यूनिवर्सिटी होता है कि समाज के अंदर जो “कॉमन-सेंस” (साधारण समझ) है , उसका क्रिटिकल एलालिसि (आलोचनात्मक विश्लेषन) किया जाए । क्रिटिकल डीबेट (आलोचनात्मक बहस) को प्रमोट (आगे बढ़ाना) किया जाए । अगर यूनिवर्सिटी इस काम में फ़ेल है , कोई देश नहीं बनेगा , देश में कोई लोग शामिल नहीं होंगे , और देश होगा सिर्फ़ और सिर्फ़ पूंजीपतियों के लिये चारागाह होगा , सिर्फ़ और सिर्फ़ लूट और शोषण का चारागाह बन कर रहा जायेगा । अगर देश के अंदर लोगों की जो संस्कृति है, लोगों की जो मान्यताएँ हैं , लोगों का जो आधिकार है , हम उसको शामिल नहीं करेंगे , तो देश नहीं बनेगा ।
हम देश के साथ पूरी तरीके से खड़े हैं । और उस सपने के साथ ख़ड़े हैं जो भगत सिंह और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने दिखाया है । हम उस सपने के साथ खड़े हैं कि सब को बराबरी का हक दिया जाये । हम उस सपने के साथ खड़े हैं कि सबको जीने का हक हो , सब खाने-पीने-रहने का हक हो , हम उस सपने के साथ खड़े हैं । और उस सपने के साथ खड़ा होने के लिये रोहित वेमुला ने अपना जान गवाया है । लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि संघियों को लानत है तुम्हारी सरकार पर , और चुनौती ही मेरी केंद्रीय सरकार हो , कि आप रोहित के मामले में जो किया है , वह जे.एन.यू. में हम नहीं होने देंगे । रोहित को पुनाली दी है, पुनवानी हम क्या देंगे , हम फ़्रीडम ऑफ़ एक्स्प्रेशन (अभिव्यक्ति की आज़ादी) के पक्ष में खड़े होंगे ।

और छोड़ दो पाकिस्तान की बात और बांग्लादेश की बात । हम कहते हैं , दुनिया के गरीबों एक हो , दुनिया के मज़दूरों एक हो , दुनिया की मानवता ज़िंदाबाद , भारत की मानवता ज़िंदाबाद । और जो उस मानवता के खिलाफ़ खड़ा हुआ है , हम उस को आईडेंटिफ़ाई (पहचान) कर चूके हैं । और आज सबसे गंभीर सवाल हमारे सामने खड़ा है , कि इस आइडेन्टफकेशन को हमको बना के रखना है । वह जो चहरा है जातिवाद का , वह जो चहरा है मनुवाद का , वह जो चहरा है ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद के घटजो़ड़ का , उस चहरे को हमको एक्सपोस है (उस का आवरन खोलकर दिखाना है) । और सचमुच का लोकतंत्र , सचमुच की आज़ादी , सबकी आज़ादी , देश में हमको स्थापित करनी है । और वह आज़ादी आयेगी , यह संविधान से आयेगी , पार्लमन्ट (संसद) से आयेगी , लोकतंत्र से आयेगी , और संसद से आयेगी , यह हम कहना चाहते हैं । और इसलिये आप तमाम साथियों से अपील (निवेदन) है कि तमाम तरीके का डिफ़्रेंसेस को साईड रखते हुए (फ़र्कों को छोड़कर) जो हमारा फ्रीडम ऑफ़ एक्स्प्रेशन है , जो हमारा कान्स्टिटूशन है , जो हमारा मुल्क है , उसकी एकता के लिये हम लोग एकजुट रहेंगे , एकमस्त रहेंगे ।

और यह जो देश तोड़नेवाली ताक़ते हैं , आतंकियों को पनह देनेवाले लोग हैं — एक सवाल अंतिम सवाल पूछते हुए अपने बात को ख़त्म करूँगा , कि कौ है कसब ? कौन है अफ़ज़ाल गुरु ? कौन है ये लोग जो आज इस स्थिति में हैं कि अपने शरीर में बम बांध कर हत्य करने को तैयार हैं ? अगर यह सवाल यूनिवर्सिटी में नहीं उठेगा मुझे नहीं लगता यूनिवर्सिटी होना का कोई मतलब है य़ अगर हम वायोलेंस को डीफ़ाईन नहीं करेंगे (हिंसा की परिभाषा तैय नहीं करेंगे कि) कैसे हम वायोलेंस को देखते हैं । हिंसा सिर्फ़ यही नहीं होती कि हम बंदूक लेकर किसी को मार देते हैं । हिंसा यह भी होती है कि संविधान में दलितों को आधिकार दिया गया है वह आधिकार जे.एन.यू. प्रशासन देने से मना करता है । यह ‘इन्स्टिटूशनल वायोलेंस’ है । ये लोग जस्टिस (न्याय) की बात करते हैं । कौन तैय करेगा की जस्टिस क्या है ? जब ब्राह्मणवादी व्यवस्था थी तो दलितों को मंदिर में नहीं घूसने देते थे , यही जस्टिस था । इस जस्टिस को हमने चैलेंज किया (चुनौती दी) । और हम आज भी ए.बी.वी.पी. सुर संघियों के जस्टिस को चैलेंज करते हैं , कि तुम्हारा जस्टिस हमारे जस्टिस को अकामोडेट नहीं करता है । (तुम्हारे न्याय में हमारे न्याय के लिये स्थान नहीं है ।) अगर तुम्हारा जस्टिस हमारे जस्टिस को अकामोडेट नहीं करता तो हम नहीं मानेंगे तुम्हारे जस्टिस को और नहीं मानेंगे तुम्हारी आज़ादी को । हम मानेंगे उस दिन आज़ादी को जिस दिन हर इंसान को उसका संविधानिक आधिकार मिलेगा । जिस दिन हर इंसान को उसका संविधानिक आधिकार देते हुए इस मुल्क के अंदर बराबरी का दर्ज़ा दिया जायेगा , उस दिन हम जस्टिस को मानेंगे ।

दोस्तों बहुत गंभीर परिस्थिति है । किसी भी तौर पर जे.एन.यू.एस.यू. (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का छात्र संघ) भी आतंकवादी का, किसी भी आतंकवादी घटना का, किसी भी देश-विरोधी एक्टिविटी (कार्य) का कोई समर्थन नहीं करता है । कड़े शब्दों में एक बात फिर से जो कुछ लोग , अनाईडेंटीफ़ाईड (अज्ञात) लोग , जो “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” के नारे लगाये हैं , जे.एन.यू.एस.यू. सुके कड़े शब्दों में भर्तसना करता है । साथ ही साथ एक बात जो है उसको आप सब लोगों को शेर करते हुए यह सवाल है जू.एन.यू. के प्रशासन और ए.बी.वी.पी. के लिये : इस कैम्पस में , हज़ार तरह की चीज़ें होती हैं । अभी आप ध्यान से ए.बी.वी.पी. का नारा सुनिये — यह कहते हैं “काम्युनिस्ट कुत्ते” । यह कहते हैं “अफ़ज़ाल गुरु के पिल्ले” । यह कहते हैं “जिहादियों के बच्चे” । हमें क्या नहीं लगता कि अगर इस संविधान ने हमें नागरिक होने का आधिकार दिया है , तो मेरे बाप को कुत्ता कहना , यह मेरे संविधानिक आधिकार का हनन है कि नहीं है ? यह सवाल मैं ए.बी.वी.पी. से पूछता हूँ ।

यह सवाल पूछना चाहते हैं जे.एन.यू के प्रकाशन से , कि आप किस के लिये काम करते हैं ? किस के साथ काम करते हैं ? और किस के आधार पे काम करते हैं ? यह बात आज बिलकुल स्पष्ट हो चुकी है कि जे.एन.यू. का प्रशासन पहले परमिशन (इजाज़त) देता है, फिर नागपुर से फ़ोन आने के बाद परमिशन लेता है । यह जो इजाज़त लेने और देने की प्रक्रिया है, यह उसी तरीके से चित तेज हो गयी है इस मुल्क में , जैसे फ़ेलोशिप लेने और देने की प्रक्रिया है । कि पहले आपको फ़ेलोशिप बढ़ाने की घोषणा की जायेगी , और फिर कहा जायेगा कि फ़ेलोशिप बंद हो गया है । यह संघी पैटर्न (तरीका) है । यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और ए.बी.वी.पी. का पैटर्न है । जिस पैटर्न से वे मुल्क को चलाना चाहते हैं । हमारा सवाल है जे.एन.यू. के वाईस चैनसलर से कि पोस्टर लगता था जे.एन.यू. में वह कायदा , परचे आये थे मेस में । अगर दिक्कत था तो पहले जे.एन.यू. का प्रशासन इजाज़त नहीं देता । अगर इजाज़त दी , तो किसके कहने से इजाज़त रद की , यह बात को जे.एन.यू. का प्रशासन स्पष्ट करे , यह सवाल हम सिर्फ़ पूछना चाहते हैं ।
साथ ही साथ यह जो लोग हैं इनकी सच्चय जान लीजिये । उन से नफ़रत मत कीजियेगा , क्योंकि हम लोग नफ़रत कर नहीं सकते । इनसे मुझे बड़ा ही दया भाव है इनकी प्रति मुझे । यह इनते उच्छल रहे हैं । क्यों ? इनको लगता है जैसे गजेन्दर चौहन को बैठाया है , वैसे हर जगह चौहन , दीवान, फ़र्मान जारी करते रहेंगे । यह चौहन , दीवान और फ़र्मान की बदौलत यह हर जगह नौकरी पाते रहेंगे । इसलिये जब यह ज़ोर से भारत माता की जय चिलाएँ तो आप समझ लीजिये कि परसों इसका इन्टर्व्यू दिल्ली यूनिवर्सिटी में होनेवाला है । नौकरी लगेगी , दशभक्ति पीछे छूटेगी । नौकरी लगेगी , भारत माता का कोई ख्याल नहीं रहेगा । नौकरी लगेगी , तिरंगा को तो इन्होंने कभी माना ही नहीं , भगवा झंडा भी नहीं फिरायेंगे । मैं सवाल करना चाहता हूँ कि यह कैसी देशभक्ति है । अगर एक मालिक अपने नौकर से सही बरताव नहीं करता है , अगर पूंजीपति अपने कर्मचारी से सही बरताव नहीं करता है , और यह अलग अलग चैनल के लोग हैं , जो पत्रिकार काम करते हैं 15-15 हज़ार रुपाये के लिये , इनके जो सी.ई.ओ. हैं , वे इनसे सही बरताव नहीं करते हैं , वह कैसी देशभक्ति है ? इनकी देशभक्ति भारत पाकिस्तान के मैच पे खत्म होती है ।

इसलिये जब रोड़ पे निकले हैं तो केलावाले के साथ बदतमीज़ी से बात करते हैं । केलावाला कहता है “साहव चालीस रुपये दर्जन भाव है ।” कहते हैं “हठ ! तुम लोग लूट रहे हो ! तीस कर दो ।” तो केलावाला जिस दिन मुड़ कर बोल देगा , तुम सबसे बड़े लूटेरे हो , क्रोड़ों लूट रहे हो , तो कह देंगे कि “यह देशद्रोही है।” आस्था अमीरी और सुविधा से शुरु होती है , अमीरी और सुविधा पे जाकर खत्म हो जाती है । मैं बहुत सारे ए.बी.वी.पी. के दोस्तों को जानता हूँ । मैं उन से पूछता हूँ कि सच में तुम्हारे अंदर में देशभक्ति की भावना पनपती है ? तो कहते हैं , “भैया क्या करें , पांच साल की सरकार है , दो साल खत्म हो गये हैं , तीन साल का टाल्क-टाईम बचा है , जो करना है इसी में कर डालना है ।” तुम हम बोले ठीक है , जो करना है कर लो , पर यह बताओ कि जे.एन.यू. के बारे में झूट बोलोगे तो कल को तुम्हारा भी कॉलर कोई पकड़ लेगा , और तुम्हारा ही साथी पकड़ लेगा , जो आजकल ट्रेन में बीफ़ चेक करता है । पकड़ के तुमको लिंचिंग करेगा (फ़ाँसी देगा) और कहेगा कि तुम जो हो , देशभक्त नहीं हो , क्योंकि तुम जे.एन.यू. का छात्र हो । इसका खतरा समझते हो ? कहता है , “भैया , इसका तो समझते हैं , इसलिये तो जे.एन.यू. का जो हैशटैग बना है , #shutdownjnu , उसका विरोध कर रहे हैं ।” हमने कहा बहुत बढ़िया है भाई साहब ! पहले #shutdownjnu हैशटैग के लिये माहौल बनाओ , फिर उसका विरोध करो क्यूंकि रहना तो जे.एन.यू. में ही है न ?

इसलिये मैं आप तमाम जे.एन.यू. के लोगों से कहना चाहता हूँ कि अभी चुनाव होगा मार्च में और ए.बी.वी.पी. के लोग ओम का झंडा लगा के आप के पाश आयेंगे , तो उन से पूछियेगा कि हम देशद्रोही हैं , हम आतंकवादी हैं , हमारा वोट ले करके तुम भी आतंकवाती हो जाओगे । तब वे कहेंगे कि “नहीं नहीं , आप लोग नहीं हैं , वे कुछ लोग थे ।” तो हम कहेंगे कि वे कुछ लोग थे ? यह बात तो तुमने मीडिया में नहीं कही , तुम्हारा वाईस चैन्सलर नहीं बोला , और तुम्हारा रेजेस्ट्रार भी नहीं बोल रहा है । और वे कुछ लोग भी तो कह रहे हैं कि हम पाकिस्तान ज़िंदाबाद नारा नहीं लगाये । वे कुछ लोग भी तो कह रहे हैं कि हमारा परमिशन देकर परमिशन कैंसल (रद) कर दिया , यह हमारे लोकतांत्रिक आधिकार के ऊपर हमला है । वे कुछ लोग भी तो कह रहे हैं कि अगर इस देश के लिये कहीं जगह लड़ाई लड़ी जा रही है तो हम उसके समर्थन में खड़े होंगे । पर इतनी बात इनके पल्ले पड़नेवाली नहीं है ।

लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यहाँ ये लोग इतने शोर्ट-नोटिस पे आये हैं , उनके पाले पड़ रहा है , और हे लोग इस कैम्पस के एक-एक छात्र के पास जायेंगे , और उन्हें बतायेंगे कि ए.बी.वी.पी. न सिर्फ़ इस देश को तोड़ रहा है बल्कि जे.एन.यू. को तोड़ रहा है । हम जे.एन.यू. को टूटने नहीं देंगे । जे.एन.यू. ज़िंदाबाद था ! जे.एन.यू. ज़िंदाबाद रहेगा ! इस देश के अंदर जितने भी संघर्ष हो रहे हैं उन संघर्षों में बढ़ चड़ कर पार्टिसिपेट करेगा (हिस्सा लेगा) , इस देश के अंदर लोकतंत्र की आवाज़ को मज़बूत करते हुए , आज़ादी की आवाज़ को मज़बूत करते हुए , फ़्रीडम ऑफ़ एक्स्रेशन की आवाज़ को मज़बूत करते हुए , इस संघर्ष को आगे बढ़ायेगा । हम संघर्ष करेंगे , जीतेंगे , सूर देश के गदरों को परास्त करेंगे , सूर इन शब्दों के साथ , आप सब का शुक्रिया , इंकलाब ज़िंदाबाद , जय भीम , लाल सलाम !

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This entry was posted on फ़रवरी 18, 2016 by and tagged , , , , , , , , , , .

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