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साहित्य, कला, और डिज़ाइन

परमेश्वर राजू — देवनागरी अक्षरों से चित्रकला

‘लोर ऑफ़ बीलीफ़’ (आस्था के कथन)

चित्रकला का प्रदर्शन

ललित कला अकादमी, मंडी हाउस, नयी दिल्ली

मार्च 31 –  अप्रल 13 , 2012

रोज़ सुबह 10:30 – शाम 7:00

आजकल ललित कला अकादमी की गैलेरी में अक्षरकला और चित्रकला का एक अनोखी, अनन्य मिश्रन प्रदार्शित किया जा रहा है — यह प्रदर्शन कलाकार परमेश्वर राजू की चित्रकला का है।  सरल शब्दों में, परमेश्वर जी ने देवनागरी लिपि-कला (calligraphy) के माध्यम से अत्यंत सहज और सुडौल ढंग से विविध प्रकार की वस्तुओं और घटनाओं का चित्रन किया है।  लेकिन असल में उन्होंने अक्षरों के आकार से जो काम किया है, वह काफ़ी जटिल और गहरा है।

इस प्रदर्शन में आप देखेंगे कि परमेश्वर जी ने देवनागरी लिपि के अक्षरों का विखंडन करके उनके बुनियादी अंगों को अलग-अलग कर दिया है।  फिर इन अंगों को नवीन तरीके से जोड़कर उन्होंने बहुत ही कम रेखाओं से भारतीय साहित्य, धर्म और लोक-संस्कृति से ली हुईं वस्तुओं के आकार बनाये हैं।  यह उनकी कला-कौशलता का प्रमाण है कि वे कितने कम रेखाओं से दर्शक के मन में एक पूरे दृश्य का निर्मान करते हैं — वे भारतवासी के सांस्कृतिक अवचेतन में प्राचीन और आदम प्रतीकों की ध्वनि चिढ़ाते हैं।

इस प्रदर्शन में उनकी कई प्रकार की रचनाएँ मौजूद हैं — कुछ हिन्दू देवताओं की प्रतिमा-कला पर आधारित हैं, कुछ रामायण जैसे महाकाव्यों की घटनाओं का चित्रन करते हैं, कुछ प्राकृतिक परिघटनाओं का रूपान्तरण करते हैं, कुछ अक्षरों के ही रूप का अन्वेषण करते हैं।  वस्तुनिष्ठ विविधता के बावजुद सामग्री और शैली की एकरूपता की वजह से समस्त प्रदर्शन को देखकर कलात्मक सटाव की अनुभूति होती है — परमेश्वर निब (कलम की नोक) से आर्काइवल कागज़ पर calligraphic स्याही लगाते हैं।  लेकिन जबकि आम कागज़ पर लिखते समय सिर्फ़ हाथ घुमाते है, परंतु आर्काइवल कागज़ का कैन्वस इतना बड़ा होता है कि उनको स्याही लगाते समय पूरा कागज़ घुमाना होता है।

परमेश्वर जी का जन्म आन्ध्र प्रदेश में स्थित विज़्यनगरम में हुआ; उनके परदादा मूर्तिकला के उस्ताद थे, जो अनेक माध्मों में मंदिरों के लिये प्रतिमाएँ और भित्तिचित्र (फ्रेस्को) बनाते थे।  चित्रकला करने के अलावा वे ग्राफ़िक डिज़ाइन का काम करते हैं और कला-शिक्षा के अनेक संस्थानों में पढ़ाते हैं।  डिज़ाइन का प्रभाव उनकी चित्रकला में साफ़ दिखाई देता है : वे बहुत सरल और प्रभावशाली ढंग से दर्शक से विचार या भाव का संप्रेशन करते हैं।

इस के बाद, उनकी इन रचनाओं का प्रदर्शन जलंधर, अमृतसर, जयपुर तथा कोचिन में किया जाएका; दिल्ली निवासियों को उनकीरचनाओं को फिर से मौका मिलेगा जून में, जब उनका प्रदर्शन ICCR की तरफ़ से आज़ाद भवन में हो रहा है।

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This entry was posted on अप्रैल 4, 2012 by and tagged , , , , .

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