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साहित्य, कला, और डिज़ाइन

हिन्दी शब्दतंत्र – शब्दकोश व साहित्य के डिजिटल अध्ययन का भविष्य ?

आज मैंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के Wordnet (वर्डनेट) प्रोग्राम पर वर्कशॉप में हिस्सा लिया ;  वर्कशॉप में अनौपचारिक तौर पर वर्डनेट के उद्भव, विकास, संरचना तथा प्रयोग की चर्चा हुई ।  १९८५ … Continue reading

जून 13, 2015 · टिप्पणी करे

सरहपाद का गीतिकोष

कुछ दिन पहले मुझे कोलंबिया के अपभ्रंश रीडिंग ग्रुप के साथ सरहपाद रचित गीतिकोष को पढ़ने का मौका मिला ।  सरहपाद (८वी. शताब्ती) बौद्ध धर्म की सिद्ध परम्परा के सबसे प्रसिद कवि थे … Continue reading

जून 4, 2015 · टिप्पणी करे

मध्यकालीन अपभ्रंश की रचना : धणवाल (धनपाल) की भविसयत्तकहा

पिछले सप्ताह मेरे मित्र और संस्कृत तथा प्राकृत के सुघड़ विद्वान ऐंड्रू ओलेट (Andrew Ollett) ने हमारा परिचय एक रुचिर व सुन्दर रचना से करवाया — मध्यकालीन जैन कवि धणवाल … Continue reading

मई 14, 2015 · टिप्पणी करे

گگن گِل- ایک دن لوٹےگی لڑکی गगन गिल – एक दिन लौटेगी लड़की

گَکن گِل ایک دِن لوٹےگی لڑکی ایک دِن لوٹےگی لڑکی ہتھیلی پر جیبھ لے کر ہاتھ ہوگا اُس کا لہو سے لتھپتھ مُنہ سےٹپکا لہو کپڑوں میں سوکھا ہوا پھر … Continue reading

अप्रैल 1, 2015 · टिप्पणी करे

اوم پرکاش والمیکی – جاتی औमप्रकाश वाल्मीकि :- जाति

جاتی اوم پرکاش والمیکی  ( जाती”, औमप्रकाश वाल्मीकि“) دیکھے ہیں یہاں ہر روز الگ الگ چہرہ رنگ روپ میں الگ نہیں پہچانی جا سکتی اُن کی جاتی بِنا پوچھ! میدان … Continue reading

मार्च 20, 2015 · टिप्पणी करे

रविदास जी पर अंतर्विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी : 23-24 फरवरी 2015

अभी मेरे पास इस संगोष्ठी की प्रस्तावना (Concept Note) आयी है. — प्रवासी संत गुरु रविदास जी पर अंतर्विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी दिनांक: 23-24 फरवरी 2015,स्थान – कन्वेंशन सेंटर, जे.एन.यू. नई दिल्ली … Continue reading

जनवरी 25, 2015 · टिप्पणी करे

राष्ट्रीय संगोष्ठी : डिंगल काव्य परम्परा और सामयिक संदर्भ 12-13 फ़रवरी 2014

राजस्थान के डिंगल में रासो और वीर गाथा रचानेवाले चारण हिन्दी साहित्य के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं ; फिर भी आजकल उनके काव्य पर बहुत कम शोध कार्य … Continue reading

जनवरी 24, 2014 · 2 टिप्पणियाँ
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